HTML का परिचय ( Introduction to HTML in Hindi )

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आज के इंटरनेट युग में, जब भी हम कोई वेबसाइट खोलते हैं, ऑनलाइन फॉर्म भरते हैं या कोई वेब ऐप इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे HTML का ही हाथ होता है। यह वेब डेवलपमेंट की वह पहली सीढ़ी है जिस पर पूरी डिजिटल दुनिया टिकी हुई है।

HTML (HyperText Markup Language) एक ऐसी सरल भाषा है जो वेबपेज का ढांचा तैयार करती है। जैसे किसी घर की नींव होती है, वैसे ही HTML किसी वेबसाइट की बुनियाद होती है। यह ब्राउज़र को बताती है कि:

  • कहाँ हेडिंग (शीर्षक) दिखाना है
  • कहाँ पैराग्राफ रखना है
  • इमेज, लिंक या बटन कैसे दिखेंगे
HTML Introduction in Hindi - Basic Web Design Notes

अगर आप वेब डेवलपमेंट सीखना चाहते हैं या एक अच्छी वेबसाइट बनाना चाहते हैं, तो HTML आपकी पहली सीढ़ी है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:

HTML क्या है? (What is HTML?)

HTML (HyperText Markup Language) एक मार्कअप भाषा है, जिसका उपयोग वेबपेज और वेब एप्लिकेशन की संरचना तैयार करने के लिए किया जाता है। यह वेब ब्राउज़र को बताती है कि वेबपेज की सामग्री (जैसे टेक्स्ट, इमेज, लिंक, वीडियो आदि) को कैसे व्यवस्थित और प्रदर्शित करना है।

सरल शब्दों में, HTML वेबसाइट का ढांचा (Structure) बनाता है, जैसे किसी इमारत की नींव। इसे CSS (जो वेबसाइट को आकर्षक बनाता है) और JavaScript (जो इंटरैक्टिव सुविधाएँ जोड़ता है) के साथ मिलाकर आधुनिक और जीवंत वेबसाइट्स बनाई जाती है

HTML का पूरा नाम (HTML full form)

HTML का पूरा नाम HyperText Markup Language है।

1. HyperText (हाइपरटेक्स्ट)

हाइपरटेक्स्ट वह टेक्स्ट है जिसमें लिंक (हाइपरलिंक) छिपे होते हैं। जब आप इस पर क्लिक करते हैं, तो यह आपको किसी दूसरे वेबपेज या डॉक्यूमेंट पर ले जाता है। यह इंटरनेट पर मौजूद करोड़ों पेजों को आपस में जोड़ने का काम करता है।

Markup Language

मार्कअप (Markup) का अर्थ है किसी डॉक्यूमेंट या टेक्स्ट में विशेष चिह्नों (टैग्स) या कोड का उपयोग करके मार्किंग करना अर्थात उसकी संरचना, स्वरूप, या अर्थ को डिफाइन करना। यह एक तरह का निर्देश होता है, जो यह बताता है कि सामग्री को कैसे दिखाना या व्यवस्थित करना है।

Language (भाषा) के संदर्भ में, जब हम HTML (HyperText Markup Language) की बात करते हैं, तो यहाँ Language का तात्पर्य एक ऐसी संरचित प्रणाली से है जो वेबपेज की संरचना और सामग्री को डिफाइन करने के लिए उपयोग की जाती है। HTML एक मार्कअप भाषा (Markup Language) है, क्योंकि यह टैग्स और एट्रीब्यूट्स के माध्यम से डेटा को व्यवस्थित और प्रदर्शित करने का कार्य करती है। यह प्रोग्रामिंग भाषाओं (जैसे JavaScript या Python) से भिन्न है, जो जटिल लॉजिक, गणनाएँ, या डायनामिक फंक्शनलिटी को लागू करने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं।

HTML का इतिहास (History of HTML)

HTML का विकास वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) के साथ शुरू हुआ। इसका इतिहास निम्नलिखित है:

  • 1990: टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee), जिन्हें वर्ल्ड वाइड वेब का जनक माना जाता है, ने HTML को विकसित किया। यह CERN (European Organization for Nuclear Research) में वैज्ञानिकों के बीच जानकारी साझा करने के लिए बनाया गया था।
  • 1993: HTML 1.0 का पहला संस्करण जारी हुआ। इसमें बुनियादी टैग्स जैसे <p>, <h1>, <a>, और <img> शामिल थे, जो केवल टेक्स्ट और लिंक को प्रदर्शित करने के लिए थे।
  • 1995: HTML 2.0 में टेबल (<table>), फॉर्म (<form>), और इमेज मैप्स जैसी नई सुविधाएँ जोड़ी गईं।
  • 1997: HTML 3.2 को लॉन्च किया गया, जिसने वेब विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया। इस संस्करण में CSS (स्टाइलिंग) और JavaScript (स्क्रिप्टिंग) का सपोर्ट जोड़ा गया, जिससे वेबपेज न केवल आकर्षक दिखने लगे बल्कि इंटरैक्टिव भी बन पाए।
  • 1999: HTML 4.0 आया, जिसने वेबपेज को और भी एडवांस्ड बनाया। इसमें मल्टीमीडिया (जैसे ऑडियो, वीडियो), बेहतर स्टाइलिंग (CSS), और स्क्रिप्टिंग (JavaScript) का बेहतर सपोर्ट दिया। यह वेब डेवलपमेंट में एक बड़ा अपग्रेड था।
  • 2014: HTML5 का आगमन हुआ, जो आधुनिक वेब के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसमें मल्टीमीडिया (<video>, <audio>), ग्राफिक्स (<canvas>, SVG), और इंटरैक्टिव सामग्री के लिए नए टैग्स और API शामिल थे।
  • वर्तमान: HTML5.2 और इसके बाद के अपडेट्स में लगातार सुधार हो रहे हैं। HTML अब केवल वेबपेज बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मोबाइल एप्लिकेशन और गेम डेवलपमेंट में भी उपयोग होता है।

HTML कैसे काम करता है? (How does HTML work?)

HTML वेबपेज बनाने और प्रदर्शित करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका कार्य निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

  1. कोड लिखना: डेवलपर HTML कोड को किसी टेक्स्ट एडिटर (जैसे Notepad, VS Code, Sublime Text) में लिखता है। उदाहरण के लिए:
  2. HTML कोड लिखना – Text Editor में HTML Code Writing
  3. फाइल को सेव करना: कोड को .html एक्सटेंशन के साथ सेव किया जाता है, जैसे index.html।
  4. HTML फाइल को सेव करना – Save HTML File Example
  5. ब्राउज़र में खोलना: HTML फाइल को वेब ब्राउज़र (जैसे Google Chrome, Firefox, Safari) में खोला जाता है।
  6. ब्राउज़र में HTML फाइल खोलना – Open HTML File in Web Browser
  7. रेंडरिंग: ब्राउज़र HTML कोड को पढ़ता है, टैग्स को समझता है, और स्क्रीन पर एक विज़ुअल वेबपेज प्रदर्शित करता है। यह प्रक्रिया रेंडरिंग (Rendering) कहलाती है | उदाहरण के लिए, <h1> टैग को बड़ा शीर्षक और <p> टैग को पैराग्राफ के रूप में दिखाया जाता है।
  8. HTML फाइल का ब्राउज़र में रेंडर होना – HTML Rendering in Browser

वेब पेज और वेब ब्राउज़र में संबंध (Relationship between Web Page and Browser)

HTML, वेब पेज, और वेब ब्राउज़र के बीच गहरा संबंध है:

Web Page (वेब पेज)

वेब पेज एक डिजिटल दस्तावेज़ है, जो HTML (HyperText Markup Language) का उपयोग करके बनाया जाता है और जिसे वेब ब्राउज़र (जैसे Chrome, Firefox) की सहायता से देखा जाता है। यह वेबसाइट का एक हिस्सा होता है, जिसमें टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, हाइपरलिंक, और अन्य तत्व शामिल हो सकते हैं। जैसे किताब का एक पेज होता है, वैसे ही वेब पेज वेबसाइट का एक हिस्सा होता है, जिसे आप देखते और इस्तेमाल करते हैं।

वेब पेज के मुख्य प्रकार (Main Types of Web Pages)

स्टैटिक वेब पेज (Static Web Page)

यह वेब पेज स्थिर होता है, यानी इसकी सामग्री (Content) तब तक नहीं बदलती जब तक उसे मैन्युअली अपडेट न किया जाए। ये HTML, CSS जैसी तकनीकों से बनाए जाते हैं और सभी उपयोगकर्ताओं को एक जैसी जानकारी दिखाते हैं।

डायनामिक वेब पेज (Dynamic Web Page)

यह वेब पेज उपयोगकर्ता की क्रिया, समय, स्थान या अन्य डेटा के आधार पर बदलता है। इसमें सर्वर-साइड स्क्रिप्टिंग (जैसे PHP, ASP.NET) या क्लाइंट-साइड स्क्रिप्टिंग (जैसे JavaScript) का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए – सोशल मीडिया पेज, लॉगिन सिस्टम आदि।

Web Browser (वेब ब्राउज़र)

वेब ब्राउज़र एक ऐसा एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर होता है (जैसे Google Chrome, Mozilla Firefox, Microsoft Edge, Safari), जिसकी मदद से हम इंटरनेट पर वेबसाइटें देख सकते हैं। यह HTML फाइल को पढ़ता है और उसमें लिखी जानकारी (जैसे टेक्स्ट, इमेज आदि) को स्क्रीन पर दिखाता है।

HTML वेब पेज की नींव होती है, जो उसकी बनावट और सामग्री को तय करती है। अगर ब्राउज़र न हो, तो HTML सिर्फ एक साधारण टेक्स्ट फाइल होती है जिसमें कोड और टैग्स लिखे होते हैं। वेब ब्राउज़र इन टैग्स को समझकर उसे ऐसा रूप देता है कि हम उसे आसानी से पढ़ और इस्तेमाल कर सकें।

HTML की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of HTML)

HTML की कई विशेषताएँ इसे वेब डेवलपमेंट के लिए एक शक्तिशाली और लोकप्रिय उपकरण बनाती हैं:

1. सरलता (Simplicity)

  • HTML सीखना बेहद आसान है, खासकर शुरुआती लोगों के लिए। इसके टैग्स सीधे, पढ़ने में सरल और प्रयोग में आसान होते हैं। कोई भी नया सीखने वाला कुछ ही घंटों में HTML के बुनियादी कोड लिखना शुरू कर सकता है।
  • उदाहरण के लिए:

    <p>यह एक पैराग्राफ है</p>

    इस टैग का उपयोग किसी पैराग्राफ को दिखाने के लिए किया जाता है, जो बहुत ही सरल और स्पष्ट है।

2. प्लेटफ़ॉर्म स्वतंत्रता (Platform Independence)

  • HTML पूरी तरह प्लेटफ़ॉर्म-स्वतंत्र तकनीक है, जिसका अर्थ है कि यह किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पर आसानी से काम करता है — जैसे Windows, macOS, Linux, Android, iOS आदि।
  • HTML कोड किसी विशेष हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर पर निर्भर नहीं होता, जिससे यह वेब डेवलपमेंट को ज्यादा लचीला और यूनिवर्सल बनाता है।

3. हाइपरलिंक समर्थन (Hyperlink Support)

  • HTML का <a> टैग हमें हाइपरलिंक बनाने की सुविधा देता है, जिससे एक वेबपेज को दूसरे वेबपेज से जोड़ा जा सकता है। यह वेब की सबसे मूलभूत और शक्तिशाली विशेषताओं में से एक है, जिससे यूज़र एक पेज से दूसरे पेज पर आसानी से नेविगेट कर सकते हैं।
  • उदाहरण:
    <a href="https://www.sidskill.in">यहाँ क्लिक करें</a>

    यह कोड एक लिंक बनाता है, जिस पर क्लिक करने से यूज़र निर्दिष्ट वेबपेज पर पहुँच जाता है।

4. मल्टीमीडिया समर्थन (Multimedia Support)

  • HTML5 ने नए टैग्स जैसे <video>, <audio>, <canvas> और SVG दिए, जिससे बिना किसी बाहरी प्लगइन के वेबपेज पर मीडिया दिखाना आसान हो गया। पहले वीडियो या एनिमेशन चलाने के लिए Adobe Flash जैसे प्लगइन्स चाहिए होते थे।
  • उदाहरण:
    <video src="movie.mp4" controls></video>

5. लचीलापन (Flexibility)

  • HTML एक ऐसा लचीला (Flexible) और उपयोगी टूल है, जो वेब डेवलपमेंट में बहुत काम आता है। इसकी मदद से छोटी ब्लॉग वेबसाइट से लेकर बड़ी वेब एप्लिकेशन जैसे Google Docs या Amazon जैसी साइटें भी बनाई जा सकती हैं।
  • HTML को CSS और JavaScript जैसी तकनीकों के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है, जिससे वेबसाइट को सुंदर, आकर्षक और इंटरैक्टिव बनाया जा सकता है।
  • HTML5 ने HTML को और भी बेहतर बना दिया है, जिससे अब यह सभी आधुनिक वेबसाइट की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

6. क्रॉस-ब्राउज़र संगतता (Cross-Browser Compatibility)

  • HTML का कोड Chrome, Firefox, Safari, Edge जैसे सभी प्रमुख ब्राउज़रों पर एक समान रूप से चलता है। इससे वेबसाइट डेवलपर्स को अलग-अलग ब्राउज़रों के लिए अलग कोड लिखने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • पुराने HTML वर्जन्स में कुछ टैग्स या फीचर्स अलग-अलग ब्राउज़रों में अलग तरह से काम करते थे। HTML5 ने नए स्टैंडर्ड्स पेश किए, जिससे सभी मॉडर्न ब्राउज़रों में वेबसाइट्स एक जैसी दिखती और काम करती हैं।

7. SEO समर्थन (Search Engine Optimization Support)

  • HTML वेबपेज को सर्च इंजनों (जैसे Google, Bing) के लिए अधिक दृश्यमान और समझने योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। HTML के कुछ खास टैग्स और संरचनाएँ सर्च इंजनों को यह समझने में मदद करती हैं कि वेबपेज किस बारे में है, जिससे वह सर्च परिणामों में बेहतर रैंक कर सकता है। यह वेबसाइट की पहुंच और उपयोगकर्ता ट्रैफिक को बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
  • HTML टैग्स जैसे <meta>, <title>, और <h1> सर्च इंजनों को वेबपेज की सामग्री को समझने में मदद करते हैं।
  • उदाहरण:
    <meta name="description" content="यह एक HTML ट्यूटोरियल है">

8. स्केलेबिलिटी (Scalability)

  • HTML का उपयोग छोटे स्थिर वेबपेज से लेकर बड़े पैमाने के वेब एप्लिकेशन तक के लिए किया जा सकता है।
  • HTML5 में शामिल API (जैसे Web Storage, Geolocation) इसे और अधिक स्केलेबल बनाते हैं।

9. रिस्पॉन्सिव डिज़ाइन (Responsive Design)

  • रिस्पॉन्सिव डिज़ाइन एक ऐसी तकनीक है जिससे वेबसाइट को इस तरह बनाया जाता है कि वह हर तरह के डिवाइस — जैसे कंप्यूटर, टैबलेट और मोबाइल — पर अच्छे से काम करे। इसका मतलब है कि वेबसाइट की साइज, लेआउट और कंटेंट खुद-ब-खुद स्क्रीन के आकार के अनुसार बदल जाते हैं।
  • HTML5 और CSS की मदद से डेवलपर्स ऐसी वेबसाइट बना सकते हैं जो सभी डिवाइस पर आसानी से चलती है और उपयोग करने में आरामदायक होती है।
  • <meta name="viewport"> टैग रिस्पॉन्सिव डिज़ाइन के लिए महत्वपूर्ण है।

10. मुफ्त और ओपन-सोर्स (Free and Open-Source)

  • HTML पूरी तरह से मुफ्त तकनीक है, जिसे कोई भी व्यक्ति, संस्था या डेवलपर बिना किसी लाइसेंस शुल्क के उपयोग कर सकता है।
  • यह एक ओपन-सोर्स स्टैंडर्ड है, जिसका विकास और देखरेख World Wide Web Consortium (W3C) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन करते हैं। W3C HTML को मानकीकृत (standardized) और नियमित रूप से अपडेट करता है ताकि यह बदलती तकनीकी जरूरतों के साथ बना रहे।

HTML: परीक्षा-विशेष महत्वपूर्ण बिंदु (Key Notes)

1. मूल परिचय (Basic Introduction)

  • पूरा नाम: HyperText Markup Language.
  • जनक (Founder): टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee), 1990 में।
  • उद्देश्य: वेबपेज का ढांचा (Structure) तैयार करना।
  • फाइल एक्सटेंशन: .html या .htm

2. मुख्य शब्दावली (Terminology)

HyperText (हाइपरटेक्स्ट)

ऐसा टेक्स्ट जिसमें अन्य वेब पेजों के लिंक (Hyperlinks) होते हैं। यह एक पेज को दूसरे पेज से जोड़ने का काम करता है।

Markup (मार्कअप)

टैग्स (<>) का उपयोग करके सामग्री को व्यवस्थित करना। यह ब्राउज़र को बताता है कि कौन सा हिस्सा हेडिंग है और कौन सा पैराग्राफ।

Rendering (रेंडरिंग)

ब्राउज़र द्वारा HTML कोड को पढ़कर उसे विज़ुअल पेज (दृश्यमान वेबपेज) में बदलने की प्रक्रिया को रेंडरिंग कहते हैं।

HTML Introduction - Exam Oriented FAQs

HTML क्या है?
HTML (HyperText Markup Language) एक मार्कअप भाषा है, जिसका उपयोग वेबपेज की संरचना बनाने के लिए किया जाता है।
HTML का पूरा नाम क्या है?
HTML का पूरा नाम HyperText Markup Language है।
HTML किसने और कब बनाया?
HTML को टिम बर्नर्स-ली ने 1990 में बनाया था।
HTML क्यों जरूरी है?
HTML वेबपेज का ढांचा(structure) तैयार करता है और ब्राउज़र को बताता है कि सामग्री कैसे प्रदर्शित करनी है।
HTML और वेब ब्राउज़र का क्या संबंध है?
HTML कोड को वेब ब्राउज़र पढ़कर सुंदर वेबपेज के रूप में प्रस्तुत करता है।
HTML में HyperText का क्या मतलब है?
HyperText वह टेक्स्ट है, जिसमें लिंक होते हैं जो दूसरे वेबपेज या डॉक्यूमेंट से जुड़ते हैं।
HTML में Markup का क्या अर्थ है?
Markup का मतलब टैग्स और कोड्स से है जो सामग्री (content) की संरचना और फॉर्मेट को निर्धारित करते हैं।
HTML फाइल को किस एक्सटेंशन के साथ सेव किया जाता है?
HTML फाइल को .html या .htm एक्सटेंशन के साथ सेव किया जाता है।
वेब पेज कितने प्रकार के होते हैं?
वेब पेज दो प्रकार के होते हैं: स्टैटिक वेब पेज और डायनामिक वेब पेज।
स्टैटिक और डायनामिक वेब पेज में क्या अंतर है?
स्टैटिक वेब पेज की सामग्री (Content) स्थिर रहती है, जबकि डायनामिक वेब पेज की सामग्री (Content) उपयोगकर्ता या परिस्थितियों के अनुसार बदलती है।

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