नेटवर्किंग क्या है? (What is Networking) – नेटवर्किंग का महत्व और इतिहास

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आज के डिजिटल दौर में Computer Networking हमारे जीवन की धड़कन बन चुकी है। सुबह उठकर व्हाट्सएप मैसेज चेक करने से लेकर ऑफिस में फाइल्स शेयर करने तक, हम हर पल एक जाल (Network) से जुड़े रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह नेटवर्किंग क्या है (What is Networking) और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

इस लेख में, हम नेटवर्किंग की सरल परिभाषा, इसके मुख्य उद्देश्य और भारत में इंटरनेट के इतिहास के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। आइए, नेटवर्किंग के इस दिलचस्प सफर को आसान भाषा में समझते हैं।

कंप्यूटर नेटवर्किंग क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में
कंप्यूटर नेटवर्किंग का परिचय - SidSkills

नेटवर्किंग क्या है? सरल परिभाषा और उदाहरण (What is Networking)

साधारण शब्दों में कहें तो नेटवर्किंग का मतलब है—दो या दो से अधिक चीजों का आपस में जुड़ाव। जिस तरह हम इंसानों का अपना एक सामाजिक नेटवर्क होता है, ठीक उसी तरह टेक्नोलॉजी की दुनिया में जब दो या दो से अधिक डिवाइस आपस में जुड़ते हैं ताकि वे जानकारी साझा कर सकें, तो उसे ही नेटवर्किंग कहा जाता है।

इसे एक रियल-लाइफ उदाहरण से समझते हैं: जब आप अपने स्मार्टफोन से किसी को WhatsApp मैसेज भेजते हैं या Phone Call पर बात करते हैं, तो आप अनजाने में ही एक विशाल नेटवर्क का उपयोग कर रहे होते हैं। बिना नेटवर्किंग के इंटरनेट का अस्तित्व संभव ही नहीं है।

अगर हम Networking शब्द को तोड़ें, तो इसमें Net का अर्थ है जाल और Working का अर्थ है काम करना। यानी कई डिवाइसेस का एक ऐसा जाल जो साथ मिलकर काम करता है।

💡 टिप: याद रखें—सिर्फ डिवाइसेस को जोड़ना ही नेटवर्किंग नहीं है, बल्कि उनके बीच डेटा का सफल Communication होना असली नेटवर्किंग है।

नेटवर्किंग की तकनीकी परिभाषा (Technical Definition)

कंप्यूटर नेटवर्किंग दो या दो से अधिक डिजिटल डिवाइसेस (जैसे कंप्यूटर, लैपटॉप, सर्वर, प्रिंटर और मोबाइल) को आपस में जोड़ने की एक प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य डेटा, फाइल्स और रिसोर्सेज (जैसे इंटरनेट या प्रिंटर) को आपस में शेयर करना होता है। यह कनेक्शन तारों के माध्यम से (Wired/Ethernet) या बिना तारों के (Wireless/Wi-Fi) हो सकता है।

नेटवर्किंग का उद्देश्य (Purpose of Networking)

  • संसाधनों को साझा करना: नेटवर्किंग से विभिन्न डिवाइसेज़ एक-दूसरे से कनेक्ट होकर संसाधनों जैसे इंटरनेट, प्रिंटर और डेटा को साझा कर सकते हैं।
  • सूचना का तेजी से आदान-प्रदान: नेटवर्किंग की मदद से जानकारी तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकती है।
  • संचार में सुधार: इंटरनेट, ईमेल, वीडियो कॉल, और सोशल मीडिया जैसी सेवाओं के माध्यम से नेटवर्किंग ने संचार को आसान बना दिया है।
  • लागत में कमी: एक साझा नेटवर्क का उपयोग करके कंपनियां और संगठन कम खर्च में अधिक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

नेटवर्किंग का महत्व (Importance of Networking)

रोज़मर्रा के जीवन में उपयोग

नेटवर्किंग आज हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

  • इंटरनेट ब्राउज़िंग, ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग सेवाओं, और सोशल मीडिया नेटवर्किंग के बिना संभव नहीं है।
  • घरों में स्मार्ट डिवाइसेज़ (जैसे स्मार्ट टीवी, IoT डिवाइसेज़) नेटवर्किंग से जुड़कर काम करते हैं।
  • स्कूल और कॉलेज में ऑनलाइन क्लासेज, प्रोजेक्ट शेयरिंग, और रिसर्च नेटवर्किंग पर निर्भर होते हैं।

तकनीकी विकास में योगदान

नेटवर्किंग के कारण कई आधुनिक तकनीकों का विकास हुआ है:

  • इंटरनेट: पूरी दुनिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग: फाइलों और डेटा को कहीं से भी एक्सेस करने की सुविधा।
  • 5G और IoT: उच्च गति इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइसेज़ का नेटवर्किंग में क्रांतिकारी योगदान।

नेटवर्किंग का इतिहास (History of Networking)

नेटवर्किंग का इतिहास कंप्यूटर और संचार प्रौद्योगिकी के विकास के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। नेटवर्किंग का मतलब कंप्यूटरों और अन्य उपकरणों को आपस में जोड़कर डेटा और संसाधनों को साझा करने की प्रक्रिया से है। यहां नेटवर्किंग के इतिहास के कुछ प्रमुख पड़ाव दिए गए हैं:

1960 का दशक: नेटवर्किंग की शुरुआत

  • 1960 के दशक में, ARPANET (Advanced Research Projects Agency Network) की शुरुआत हुई।
  • यह अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) द्वारा विकसित किया गया था।
  • पहला संदेश (Message) 1969 में UCLA और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के बीच भेजा गया।
  • शुरुआत में ARPANET से चार कंप्यूटर (नोड) जुड़े थे:
    • University of California, Los Angeles (UCLA)
    • Stanford Research Institute, Stanford University
    • University of California, Santa Barbara (UCSB)
    • University of Utah
  • इस दशक में पैकेट स्विचिंग की अवधारणा विकसित हुई, जो आधुनिक नेटवर्किंग का आधार बनी। पॉल बरन (Paul Baran) और डोनाल्ड डेविस (Donald Davies) जैसे वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को विकसित किया।

1970 का दशक - पहला ईमेल और TCP/IP

  • पहला ईमेल: रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson) ने 1971 में पहला ईमेल भेजा। उन्होंने @ चिह्न का इस्तेमाल किया, जो आज भी ईमेल पते में प्रयोग होता है।
  • TCP/IP: विंट सर्फ (Vint Cerf) और रॉबर्ट कान (Robert Kohn) ने 1973 में TCP/IP विकसित किया, जिससे अलग-अलग नेटवर्क आपस में जुड़ सके। इस तकनीक ने इंटरनेट की नींव रखी, इसलिए इन्हें Father of the Internet कहा जाता है।

1980 का दशक - LAN और DNS

  • ईथरनेट: रॉबर्ट मेटकॉफ (Robert Metcalfe) ने 1973 में ईथरनेट बनाया, जो 1980 में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हुआ। यह लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) के लिए तारों से उपकरण जोड़ने की तकनीक थी।
  • DNS: पॉल मॉकापेट्रिस (Paul Mockapetris) ने 1983 में डोमेन नेम सिस्टम बनाया। यह नंबर (IP एड्रेस) को नाम (जैसे google.com) में बदलता है, जिससे वेबसाइट ढूंढना आसान हुआ।
  • 1983 में ARPANET ने TCP/IP को पूरी तरह अपनाया, जिसे इंटरनेट की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।

1990 का दशक - वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)

  • WWW: टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee) ने 1991 में वर्ल्ड वाइड वेब बनाया। यह हाइपरटेक्स्ट (लिंक) का इस्तेमाल करके जानकारी को जोड़ता था।
  • पहला ब्राउज़र: मार्क आंद्रेसेन (Marc Andreessen) ने 1993 में Mosaic ब्राउज़र बनाया, जो बाद में नेटस्केप बना। यह ग्राफिक्स के साथ वेबसाइट दिखाता था।
  • ई-कॉमर्स: Amazon (1994) और eBay (1995) ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म की शुरुवात हुई |1995 में इंटरनेट आम लोगों के लिए खुला।

2000 का दशक - वाई-फाई और सोशल मीडिया

  • वाई-फाई: विक्टर हायेस (Victor Hayes) और ब्रूस टॉकर (Bruce Tocker) ने 1997 में वाई-फाई (802.11) तकनीक विकसित की, जो बिना तारों के नेटवर्किंग को मुमकिन बनाती थी।
  • सोशल मीडिया: Facebook (मार्क जुकरबर्ग, 2004), YouTube (स्टीव चेन, चाड हर्ली, जावेद करीम, 2005), और Twitter (जैक डोर्सी, 2006) शुरू हुए।
  • इस दशक में ब्रॉडबैंड ने इंटरनेट को तेज़ किया और मोबाइल नेटवर्क (3G) लोकप्रिय हुआ। लोगों ने ऑनलाइन जुड़ना और साझा करना शुरू किया।

2010 का दशक - क्लाउड कंप्यूटिंग और 4G नेटवर्क का विस्तार

  • क्लाउड कंप्यूटिंग: Amazon Web Services (AWS) - 2006, माइक्रोसॉफ्ट Azure - 2010
  • 4G नेटवर्क: नोकिया और एरिक्सन (Nokia & Ericsson) ने 4G तकनीक विकसित की - 2009-2010 | पहला 4G नेटवर्क स्वीडन और नॉर्वे (2009) में लॉन्च हुआ।
  • साइबर सुरक्षा: Ethical Hacking और एंटीवायरस तकनीकों में सुधार हुआ।

2020 और आगे - 5G, IOT और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

2020 के बाद तकनीक तेजी से बदली, जिससे इंटरनेट तेज हुआ, डिवाइसेस स्मार्ट हुए और AI का उपयोग बढ़ा।

  • 5G नेटवर्क (2019-2020): हुआवेई, क्वालकॉम, नोकिया, एरिक्सन ने मिलकर इसे विकसित किया। तेज इंटरनेट और बेहतर कनेक्टिविटी मिली।
  • IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स): केविन एश्टन (1999) ने इसका विचार दिया, लेकिन 2010 के बाद यह लोकप्रिय हुआ। स्मार्ट होम और हेल्थकेयर में बड़ा बदलाव आया।
  • AI और मशीन लर्निंग: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, IBM ने AI आधारित चैटबॉट, वॉइस असिस्टेंट और साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाया।

भारत में नेटवर्किंग की शुरुआत और इतिहास (History of Networking in India)

1980 का दशक: नेटवर्किंग की शुरुआत

  • 1986 में, ERNET (Education and Research Network) की स्थापना हुई, जो भारत में पहला कंप्यूटर नेटवर्क था।
  • ERNET का उद्देश्य शिक्षा और शोध संस्थानों को जोड़ना था।
  • इस दशक में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क (Telecom Network) का भी विकास शुरू हुआ।

1990 का दशक: इंटरनेट की शुरुआत

  • 15 अगस्त 1995 में, VSNL (Videsh Sanchar Nigam Limited) ने भारत में इंटरनेट सेवाएं शुरू कीं।
  • इसी दशक में सॉफ्टवेयर और आईटी उद्योग का तेजी से विकास हुआ, जिसने नेटवर्किंग को बढ़ावा दिया।
  • 20 फरवरी 1997 में, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की स्थापना हुई, जिसने दूरसंचार और नेटवर्किंग सेवाओं को विनियमित किया।

2000 का दशक: ब्रॉडबैंड और मोबाइल नेटवर्किंग

  • 2004 में, ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू हुईं, जिसने इंटरनेट की गति और पहुंच को बढ़ाया।
  • 2008 में, 3G नेटवर्क की शुरुआत हुई, जिसने मोबाइल इंटरनेट को लोकप्रिय बनाया।
  • इसी दशक में Wi-Fi और फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क का भी विस्तार हुआ।

2010 का दशक: डिजिटल इंडिया और 4G

  • भारत में 4G सेवाओं की शुरुआत 2012 में हुई थी। भारती एयरटेल ने अप्रैल 2012 में कोलकाता में पहली बार 4G नेटवर्क पेश किया था।
  • 2015 में, डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना था।
  • 2016 में रिलायंस जियो ने 4G इंटरनेट क्रांति लाई, जिसने सस्ते और तेज इंटरनेट की सुविधा प्रदान की।
  • इस दशक में क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर का भी तेजी से विकास हुआ।

2020 और आगे: 5G और IOT

  • 2020 के बाद, 5G नेटवर्क की तैयारी शुरू हुई, जिसने अत्यधिक तेज इंटरनेट और कनेक्टिविटी की संभावना पैदा की।
  • भारत में 5G सेवाओं की शुरुआत 1 अक्टूबर 2022 को हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) के छठे संस्करण में 5G नेटवर्क का उद्घाटन किया। शुरुआत में, एयरटेल ने दिल्ली, मुंबई, वाराणसी, बैंगलोर, गुरुग्राम, चेन्नई जैसे लगभग 8 शहरों में 5G सेवाएं प्रदान करनी शुरू कीं।
  • IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने नेटवर्किंग को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग नेटवर्किंग में बढ़ रहा है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Pro-Notes for Exams)

  • ARPANET: दुनिया का पहला नेटवर्क (1969)।
  • ERNET: भारत का पहला एजुकेशनल नेटवर्क (1986)।
  • Father of Internet: विंट सर्फ (Vint Cerf)।
  • Father of WWW: टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee)।
  • @ Symbol: रे टॉमलिंसन ने 1971 में ईमेल के लिए चुना।
  • VSNL: भारत में इंटरनेट लाने वाली पहली कंपनी (15 Aug 1995)।

Basic Networking : Exam Oriented FAQs

नेटवर्किंग क्या है?
नेटवर्किंग दो या दो से अधिक डिवाइसेज (जैसे कंप्यूटर, मोबाइल, प्रिंटर) के बीच डेटा, संसाधन और सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है। यह वायर्ड (ईथरनेट) या वायरलेस (Wi-Fi, ब्लूटूथ) तरीके से हो सकती है।
नेटवर्किंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नेटवर्किंग का मुख्य उद्देश्य संसाधनों को साझा करना, सूचना का तेजी से आदान-प्रदान, संचार में सुधार और लागत में कमी करना है।
नेटवर्किंग का सबसे बड़ा उदाहरण क्या है?
इंटरनेट नेटवर्किंग का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो पूरी दुनिया को जोड़ता है।
नेटवर्किंग की शुरुआत कब और कैसे हुई?
नेटवर्किंग की शुरुआत 1960 के दशक में ARPANET से हुई। यह अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा विकसित किया गया था और 1969 में पहला संदेश UCLA से स्टैनफोर्ड भेजा गया।
भारत में पहला नेटवर्क कौन सा था और कब शुरू हुआ?
भारत में पहला नेटवर्क ERNET (Education and Research Network) था, जिसकी स्थापना 1986 में हुई। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध संस्थानों को जोड़ना था।
4G सेवाएँ भारत में कब शुरू हुईं?
भारत में 4G सेवाएँ 2012 में शुरू हुईं। भारती एयरटेल ने अप्रैल 2012 में कोलकाता में पहली बार 4G नेटवर्क लॉन्च किया। बाद में, 2016 में रिलायंस जियो के प्रवेश से 4G सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ।
5G सेवाएँ भारत में कब शुरू हुईं और किसने उद्घाटन किया?
भारत में 5G सेवाएँ 1 अक्टूबर 2022 को शुरू हुईं। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में किया।
भारत में डिजिटल इंडिया अभियान कब शुरू हुआ और इसका उद्देश्य क्या है?
डिजिटल इंडिया अभियान 2015 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सक्षम बनाना और इंटरनेट सेवाओं का विस्तार करना है।
IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) का विचार किसने दिया और यह कब लोकप्रिय हुआ?
IoT का विचार केविन एश्टन (Kevin Ashton) ने 1999 में दिया, लेकिन यह 2010 के दशक के बाद लोकप्रिय हुआ।
IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) क्या है?
IoT एक नेटवर्किंग तकनीक है, जिसमें स्मार्ट डिवाइस (जैसे स्मार्ट होम, स्मार्टवॉच) इंटरनेट से कनेक्ट होकर डेटा का आदान-प्रदान करते हैं।

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