क्या आपने कभी सोचा है कि कंप्यूटर के इतने सारे अलग-अलग हिस्से—जैसे प्रोसेसर, रैम और हार्ड डिस्क—एक साथ मिलकर इतनी सटीकता से काम कैसे करते हैं? इसका श्रेय जाता है मदरबोर्ड (Motherboard) को।
मदरबोर्ड का नाम "Mother" शब्द से प्रेरित है। जिस तरह एक माँ परिवार के सभी सदस्यों को जोड़कर रखती है और उनकी देखभाल करती है, ठीक वैसे ही मदरबोर्ड कंप्यूटर के हर छोटे-बड़े कंपोनेंट को एक-दूसरे के साथ एकीकृत (Integrate) और समन्वित (Coordinate) करता है। इसके बिना कंप्यूटर के पार्ट्स केवल इलेक्ट्रॉनिक कचरा हैं।
यदि आप ITI COPA के छात्र हैं या कंप्यूटर हार्डवेयर को गहराई से समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। इस ब्लॉग पोस्ट में हम मदरबोर्ड के बारे में निम्नलिखित विषयों को विस्तार से कवर करेंगे:
- मदरबोर्ड क्या है? (What is Motherboard)
- मदरबोर्ड के घटक (Component of Motherboard)
- मदरबोर्ड का फॉर्म फैक्टर (Form Factor of Motherboard)
मदरबोर्ड क्या है? (What is Motherboard?)
मदरबोर्ड (Motherboard) कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण सर्किट बोर्ड होता है, जिसे अक्सर मुख्य बोर्ड (Main Board) या सिस्टम बोर्ड (System Board) के नाम से भी जाना जाता है। असल में, यह वह मुख्य प्लेटफॉर्म है जो कंप्यूटर के सभी जरूरी हिस्सों (Components) को एक साथ जोड़ता है और उन्हें काम करने के काबिल बनाता है।
इसे हम कंप्यूटर की रीढ़ की हड्डी भी कह सकते हैं, क्योंकि बिना मदरबोर्ड के कंप्यूटर के अन्य हिस्से न तो एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं और न ही आपस में बातचीत (Communication) कर सकते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, प्रोसेसर से लेकर रैम और हार्ड डिस्क तक, सब कुछ इसी पर टिका होता है।
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▸ कंप्यूटर फंडामेंटल (Computer Fundamentals) - शुरू से अंत तक पूरी जानकारीमदरबोर्ड के मुख्य भाग (Main Components of Motherboard)
कंप्यूटर की बेहतर कार्यक्षमता के लिए मदरबोर्ड पर कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स लगे होते हैं। यहाँ मदरबोर्ड के उन सभी मुख्य भागों की सूची दी गई है जिनके बारे में हर कंप्यूटर छात्र को पता होना चाहिए:
- ➤ सीपीयू सॉकेट (CPU Socket)
- ➤ चिपसेट (Chipset)
- ➤ मेमोरी स्लॉट्स (RAM Slots)
- ➤ पीसीआई स्लॉट्स (PCIe Slots)
- ➤ साटा पोर्ट्स (SATA Ports)
- ➤ बायोस (BIOS/UEFI)
- ➤ पावर कनेक्टर्स (Power Connectors)
- ➤ यूएसबी हेडर (USB Headers)
- ➤ CMOS बैटरी (CMOS Battery)
- ➤ फ्रंट पैनल कनेक्टर्स
- ➤ आई/ओ पोर्ट्स (I/O Ports)
- ➤ हीट सिंक और फैन कनेक्टर
- ➤ एम.2 स्लॉट्स (M.2 SSD Slots)
1. सीपीयू सॉकेट (CPU Socket)
सीपीयू सॉकेट मदरबोर्ड पर स्थित वह मुख्य स्लॉट होता है, जहाँ कंप्यूटर के प्रोसेसर (CPU) को फिट किया जाता है। यह एक विशेष प्रकार का कनेक्टर है जो प्रोसेसर और मदरबोर्ड के बीच एक मजबूत कनेक्शन बनाता है। अलग-अलग प्रोसेसर मॉडल के अनुसार सॉकेट का डिजाइन भी अलग होता है (जैसे Intel के लिए LGA और AMD के लिए PGA सॉकेट)।
इस सॉकेट का मुख्य कार्य प्रोसेसर को जरूरी पावर सप्लाई देना और डेटा ट्रांसफर के लिए रास्ता प्रदान करना है। इसी के माध्यम से प्रोसेसर कंप्यूटर के अन्य सभी हार्डवेयर घटकों के साथ सही तालमेल बिठाकर डेटा प्रोसेस कर पाता है।
CPU सॉकेट के मुख्य प्रकार (Types of CPU Socket)
मदरबोर्ड पर प्रोसेसर को फिट करने के तरीके के आधार पर CPU सॉकेट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।
- PGA (Pin Grid Array)
- LGA (Land Grid Array)
- BGA (Ball Grid Array)
PGA (Pin Grid Array)
PGA तकनीक में प्रोसेसर के निचले हिस्से पर छोटी-छोटी पिन्स (Pins) लगी होती हैं, जिन्हें मदरबोर्ड पर बने छिद्रों (Holes) में सावधानीपूर्वक फिट किया जाता है।
उपयोग: यह तकनीक पहले इंटेल (Intel) द्वारा इस्तेमाल की जाती थी, लेकिन वर्तमान में यह मुख्य रूप से AMD (Advanced Micro Devices) के प्रोसेसर्स में अधिक देखने को मिलती है।
सावधानी और जोखिम: PGA सॉकेट में प्रोसेसर को इंस्टॉल करना काफी आसान है, लेकिन इसमें एक बड़ा जोखिम भी शामिल है। यदि हैंडलिंग के दौरान प्रोसेसर की एक भी पिन मुड़ जाए या टूट जाए, तो पूरा प्रोसेसर खराब हो सकता है। चूँकि प्रोसेसर की कीमत मदरबोर्ड से कहीं अधिक होती है, इसलिए इसे फिट करते समय बहुत सावधानी की आवश्यकता होती है।
LGA (Land Grid Array)
LGA तकनीक में पिन्स प्रोसेसर के बजाय सीधे मदरबोर्ड पर बनी होती हैं। प्रोसेसर के निचले हिस्से पर सिर्फ फ्लैट मेटल पैड्स (Lands) होते हैं, जो इन पिन्स के संपर्क में आकर काम करते हैं।
इसमें कीमती प्रोसेसर के खराब होने का डर कम रहता है, क्योंकि पिन्स मदरबोर्ड पर सुरक्षित होती हैं।
यह मुख्य रूप से Intel के आधुनिक प्रोसेसर्स में इस्तेमाल होने वाला सबसे लोकप्रिय सॉकेट डिजाइन है।
BGA (Ball Grid Array)
BGA तकनीक में प्रोसेसर के नीचे पिन्स की जगह छोटी सोल्डर बॉल्स (Solder Balls) होती हैं। इन्हें सोल्डरिंग की मदद से सीधे मदरबोर्ड पर स्थायी रूप से फिक्स कर दिया जाता है।
एक बार फिट होने के बाद प्रोसेसर को निकालना या बदलना (Upgrade) लगभग असंभव होता है।
इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल डिवाइसेस में किया जाता है जहाँ जगह कम होती है।
2. चिपसेट (Chipset)
चिपसेट मदरबोर्ड का वह मुख्य कंट्रोलर है जो CPU, मेमोरी और अन्य हार्डवेयर के बीच डेटा के बहाव (Data Flow) को मैनेज करता है।
पारंपरिक डिजाइन में चिपसेट दो मुख्य हिस्सों में बंटा होता है:
- नॉर्थब्रिज (Northbridge): यह हाई-स्पीड कंपोनेंट्स जैसे CPU, RAM और ग्राफ़िक्स कार्ड के बीच संचार को संभालता है। यह प्रोसेसर के पास स्थित होता है।
- साउथब्रिज (Southbridge): यह कम स्पीड वाली डिवाइस जैसे USB पोर्ट्स, हार्ड ड्राइव (SATA), ऑडियो और BIOS को कंट्रोल करता है।
नोट: आधुनिक मदरबोर्ड डिजाइन में अब नॉर्थब्रिज और साउथब्रिज का पुराना आर्किटेक्चर खत्म हो गया है। अब नॉर्थब्रिज के मुख्य कार्यों को सीधे CPU के अंदर ही शामिल कर दिया गया है। वहीं, साउथब्रिज के बाकी बचे हुए इनपुट-आउटपुट कार्यों को संभालने के लिए एक सिंगल चिप बनाई गई है, जिसे PCH (Platform Controller Hub) कहा जाता है।
3. मेमोरी स्लॉट्स (RAM Slots)
मेमोरी स्लॉट्स मदरबोर्ड पर स्थित वे स्लॉट्स होते हैं जहाँ रैम (RAM) मॉड्यूल्स को फिट या इंस्टॉल किया जाता है। इन्हें 'रैम स्लॉट्स' के नाम से भी जाना जाता है और ये सीधे तौर पर कंप्यूटर की मल्टीटास्किंग क्षमता को प्रभावित करते हैं।
हर मदरबोर्ड एक निश्चित प्रकार की रैम को ही सपोर्ट करता है, जैसे DDR3, DDR4 या DDR5। आप एक प्रकार के स्लॉट में दूसरे प्रकार की रैम फिट नहीं कर सकते।
साधारण मदरबोर्ड में आमतौर पर 2 या 4 स्लॉट्स होते हैं, जबकि हाई-एंड सर्वर मदरबोर्ड में इनकी संख्या 8 या उससे अधिक भी हो सकती है।
ये स्लॉट्स निर्धारित करते हैं कि आपका सिस्टम अधिकतम कितनी रैम (जैसे 16GB, 32GB या 128GB) सपोर्ट करेगा।
4. पीसीआई स्लॉट्स (PCI/PCIe Slots)
पीसीआई स्लॉट्स मदरबोर्ड पर दिए गए वे एक्सपेंशन स्लॉट्स होते हैं, जिनका उपयोग कंप्यूटर की कार्यक्षमता (Functionality) को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इनकी मदद से हम कंप्यूटर में अलग से ग्राफिक्स कार्ड, साउंड कार्ड, और नेटवर्क कार्ड जैसे कंपोनेंट्स को फिट कर सकते हैं।
पीसीआई स्लॉट्स के मुख्य प्रकार (Types of PCI Slots)
समय के साथ इनके डिजाइन और स्पीड में काफी बदलाव आए हैं। मुख्य रूप से ये तीन प्रकार के होते हैं:
1. PCI (Peripheral Component Interconnect)
यह एक पुराना स्टैंडर्ड है। इसकी डेटा ट्रांसफर स्पीड धीमी होती थी, इसलिए आजकल के आधुनिक मदरबोर्ड्स में यह बहुत कम देखने को मिलता है।
2. PCI-X (PCI eXtended)
यह पुराने PCI स्लॉट का ही एक एडवांस वर्जन है, जिसे विशेष रूप से सर्वर और वर्कस्टेशन के लिए बनाया गया था ताकि अधिक डेटा ट्रांसफर स्पीड मिल सके।
3. PCIe (PCI Express)
PCIe वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड स्टैंडर्ड है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अलग-अलग साइज और डेटा ट्रांसफर स्पीड (Lanes) में आता है, जैसे x1, x4, x8, और x16।
5. साटा पोर्ट्स (SATA Ports)
SATA (Serial Advanced Technology Attachment) पोर्ट एक ऐसा इंटरफेस है जिसका उपयोग हार्ड ड्राइव (HDD), सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD) और ऑप्टिकल ड्राइव को मदरबोर्ड से जोड़ने के लिए किया जाता है। इसका मुख्य कार्य स्टोरेज डिवाइस और मदरबोर्ड के बीच हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर सुनिश्चित करना है।
SATA तकनीक ने पुरानी PATA (Parallel ATA) तकनीक की जगह ली है। PATA (जिसे IDE भी कहा जाता था) की तुलना में SATA के केबल पतले होते हैं और इसकी डेटा ट्रांसफर स्पीड काफी अधिक होती है। जहाँ PATA में चौड़े रिबन केबल का इस्तेमाल होता था, वहीं SATA ने कनेक्शन को सरल और व्यवस्थित बना दिया है।
हालांकि NVMe और PCIe जैसे नए इंटरफेस आ गए हैं, जो SATA से कहीं ज्यादा तेज हैं, लेकिन SATA अभी भी बजट फ्रेंडली और पुराने सिस्टम्स के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है।
6. बायोस चिप (BIOS/UEFI Chip)
BIOS (Basic Input/Output System) मदरबोर्ड पर स्थित एक छोटी मेमोरी चिप होती है, जिसमें कंप्यूटर को स्टार्ट (Boot) करने के निर्देश स्टोर रहते हैं। जब आप पावर बटन दबाते हैं, तो सबसे पहले BIOS ही सक्रिय होता है और हार्डवेयर की जाँच (POST - Power On Self Test) करता है।
BIOS और UEFI में मुख्य अंतर:
BIOS: यह एक पुरानी तकनीक है जो केवल कीबोर्ड को सपोर्ट करती है और इसमें टेक्स्ट-आधारित इंटरफेस होता है। यह 2TB से बड़ी हार्ड ड्राइव को सपोर्ट नहीं करता।
UEFI: यह आधुनिक इंटरफेस है जो माउस सपोर्ट के साथ आता है। यह BIOS से कहीं ज्यादा सुरक्षित है, तेजी से बूट होता है और 2TB से बड़ी स्टोरेज ड्राइव को आसानी से सपोर्ट करता है।
नोट: आजकल के ज्यादातर नए कंप्यूटर्स में UEFI ही इस्तेमाल होता है, लेकिन कई लोग इसे आज भी बोलचाल में BIOS ही कह देते हैं।
7. पावर कनेक्टर्स (Power Connectors)
पावर कनेक्टर्स का मुख्य कार्य SMPS (Power Supply) से बिजली लेकर मदरबोर्ड और उसके विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाना है। एक प्रोफेशनल कंप्यूटर सेटअप में मुख्य रूप से दो प्रकार के कनेक्टर्स देखे जाते हैं:
1. 24-पिन ATX कनेक्टर: यह मदरबोर्ड का सबसे बड़ा पावर कनेक्टर होता है, जो पूरे बोर्ड के सर्किट को बिजली प्रदान करता है।
2. 4/8-पिन CPU कनेक्टर: यह कनेक्टर विशेष रूप से प्रोसेसर (CPU) को अतिरिक्त पावर देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि वह भारी लोड में भी सही ढंग से काम कर सके।
प्रो टिप: कंप्यूटर फिट करते समय सुनिश्चित करें कि ये कनेक्टर्स पूरी तरह से अंदर बैठे हों, क्योंकि ढीले कनेक्शन से सिस्टम बार-बार रीस्टार्ट (Restart) हो सकता है।
8. यूएसबी हेडर (USB Headers)
यूएसबी हेडर मदरबोर्ड पर स्थित वे पिन्स होती हैं, जिनका उपयोग कैबिनेट (Case) के सामने वाले Front USB Ports को सक्रिय करने के लिए किया जाता है।
ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: USB 2.0 (9-पिन) और USB 3.0/3.1 (19-पिन)। इनका मुख्य उद्देश्य कीबोर्ड, माउस या पेनड्राइव को कंप्यूटर के सामने वाले हिस्से से सीधे जोड़ने की सुविधा देना है।
9. CMOS बैटरी (CMOS Battery)
CMOS बैटरी एक छोटा 3V का बटन सेल (CR2032) होता है, जो मदरबोर्ड पर लगा होता है। इसका मुख्य कार्य कंप्यूटर बंद होने या पावर कट होने के बाद भी तारीख (Date), समय (Time) और BIOS की जरूरी सेटिंग्स को सुरक्षित रखना है।
अगर यह बैटरी खराब हो जाए, तो कंप्यूटर चालू करते समय अक्सर CMOS Checksum Error आता है और सिस्टम का टाइम बार-बार गलत हो जाता है।
प्रो टिप: एक सामान्य CMOS बैटरी 3 से 5 साल तक चलती है। अगर आपका कंप्यूटर बार-बार गलत समय दिखाने लगे, तो समझ जाइये कि इसे बदलने का समय आ गया है।
10. फ्रंट पैनल कनेक्टर्स (Front Panel Connectors)
फ्रंट पैनल कनेक्टर्स मदरबोर्ड पर मौजूद वे छोटी पिन्स होती हैं, जिनसे कंप्यूटर कैबिनेट के बाहरी बटन्स और लाइट्स को जोड़ा जाता है। इनके बिना आप कैबिनेट के पावर बटन से कंप्यूटर को चालू नहीं कर सकते।
इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित कनेक्शंस शामिल होते हैं:
- Power SW: कंप्यूटर को चालू और बंद करने वाले बटन के लिए।
- Reset SW: कंप्यूटर को रिस्टार्ट करने वाले बटन के लिए।
- HDD LED: हार्ड डिस्क की वर्किंग दिखाने वाली छोटी लाइट के लिए।
- Power LED: कंप्यूटर के On होने का संकेत देने वाली लाइट के लिए।
11. आई/ओ पोर्ट्स (I/O Ports)
I/O पोर्ट्स (Input/Output Ports) मदरबोर्ड के पिछले हिस्से (Back Panel) में स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य बाहरी उपकरणों (Peripherals) को कंप्यूटर से जोड़ना है ताकि डेटा का आदान-प्रदान हो सके।
मुख्य पोर्ट्स और उनके उपयोग:
- USB Ports: कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर और पेनड्राइव जैसे उपकरणों के लिए।
- HDMI/VGA: मॉनिटर या प्रोजेक्टर को जोड़कर डिस्प्ले प्राप्त करने के लिए।
- Ethernet (RJ-45): वायर्ड इंटरनेट या नेटवर्किंग केबल जोड़ने के लिए।
- Audio Jacks: स्पीकर, हेडफोन और माइक्रोफोन के कनेक्शन के लिए।
- PS/2 Port: पुराने मॉडल के कीबोर्ड और माउस के लिए (अब कम उपयोग होते हैं)।
प्रो टिप: हमेशा नीले रंग वाले USB पोर्ट का उपयोग हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर (जैसे External SSD) के लिए करें, क्योंकि ये USB 3.0 या उससे ऊपर के वर्जन होते हैं।
12. हीट सिंक और फैन कनेक्टर (Heat Sink & Fan Connectors)
कंप्यूटर के चलते समय प्रोसेसर और अन्य कंपोनेंट्स काफी गर्म हो जाते हैं। उन्हें ठंडा रखने और ओवरहीटिंग से बचाने के लिए हीट सिंक और फैन कनेक्टर्स का उपयोग किया जाता है।
प्रो टिप: प्रोसेसर और हीट सिंक के बीच Thermal Paste लगाना कभी न भूलें। यह गर्मी को बेहतर तरीके से ट्रांसफर करने में मदद करता है।
13. एम.2 स्लॉट्स (M.2 Slots)
M.2 स्लॉट आधुनिक मदरबोर्ड में मिलने वाला एक छोटा और बेहद तेज इंटरफेस है। इसका मुख्य उपयोग Next Generation SSDs को फिट करने के लिए किया जाता है। ये स्लॉट्स पुराने SATA पोर्ट्स की तुलना में काफी कम जगह घेरते हैं और सीधे मदरबोर्ड पर चिप की तरह लग जाते हैं।
M.2 SSD के मुख्य प्रकार
मार्केट में मुख्य रूप से दो तरह की M.2 SSD उपलब्ध हैं, जिन्हें उनके काम करने के तरीके से पहचाना जाता है:
1. SATA M.2 SSDs
ये पुराने SATA मानकों पर काम करती हैं। इनकी अधिकतम स्पीड लगभग 600 MB/s तक ही सीमित होती है। ये उन यूजर्स के लिए अच्छी हैं जो बजट में स्टोरेज अपग्रेड करना चाहते हैं।
2. NVMe M.2 SSDs
ये PCIe तकनीक का उपयोग करती हैं और वर्तमान में सबसे तेज मानी जाती हैं। इनकी गति 3,500 MB/s से 7,500 MB/s (Gen 4/5 के अनुसार) तक हो सकती है। वीडियो एडिटिंग और गेमिंग के लिए ये सबसे बेस्ट विकल्प हैं।
प्रो टिप: M.2 SSD खरीदते समय हमेशा स्लॉट की की (Key) और लंबाई (जैसे 2280) की जाँच कर लें, ताकि वह आपके मदरबोर्ड में सही तरीके से फिट हो सके।
मदरबोर्ड का फॉर्म फैक्टर (Form Factor of Motherboard)
मदरबोर्ड में Form Factor का अर्थ उस भौतिक आकार और लेआउट से है, जिसके अनुसार मदरबोर्ड को डिज़ाइन किया गया होता है। यह न केवल मदरबोर्ड के आकार को निर्धारित करता है, बल्कि उस पर मौजूद घटकों के प्लेसमेंट और विस्तार क्षमता को भी प्रभावित करता है। यहां मदरबोर्ड के फॉर्म फैक्टर के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है
1. ATX (Advanced Technology eXtended)
यह सबसे लोकप्रिय और स्टैंडर्ड फॉर्म फैक्टर है। इसका आकार 12 × 9.6 इंच होता है। इसमें 6 से 7 PCIe स्लॉट्स और अधिक रैम स्लॉट्स मिलते हैं, जो इसे गेमिंग और प्रोफेशनल वर्कस्टेशन के लिए बेस्ट बनाते हैं।
2. Micro-ATX
यह ATX का छोटा वर्जन है जिसका आकार 9.6 × 9.6 इंच होता है। इसमें PCIe स्लॉट्स की संख्या कम (3-4) होती है, लेकिन यह कम कीमत और मीडियम साइज कैबिनेट में आसानी से फिट होने के कारण ऑफिस पीसी के लिए बहुत लोकप्रिय है।
3. Mini-ITX
यह 6.7 × 6.7 इंच के बहुत ही कॉम्पैक्ट साइज में आता है। इसे विशेष रूप से छोटे और पोर्टेबल सिस्टम के लिए बनाया गया है। इसमें आमतौर पर केवल 1 PCIe स्लॉट होता है और यह बहुत कम बिजली की खपत करता है।
4. E-ATX (Extended ATX)
यह 12 × 13 इंच का विशाल मदरबोर्ड है। इसका उपयोग हाई-एंड सर्वर और वर्कस्टेशन में किया जाता है जहाँ बहुत अधिक रैम और मल्टीपल ग्राफिक्स कार्ड्स की जरूरत होती है। इसे इंस्टॉल करने के लिए बड़े टावर कैबिनेट (Full Tower Case) की आवश्यकता होती है।
5. Nano-ITX और Pico-ITX
ये बहुत ही छोटे (4.7 इंच से कम) साइज के मदरबोर्ड होते हैं। इनका उपयोग साधारण कंप्यूटर में नहीं, बल्कि IoT डिवाइसेस, स्मार्ट टीवी और एम्बेडेड सिस्टम्स में किया जाता है।
